॥ डरपोक और डिगने वाले नहीं॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : पंद्रह)डूराडीह गांव का कुंदन मुंडानहीं है डरपोक,रामगढ़ का रतन मुंडा डिगने वाला नहीं है।धौंस-पटूटी जमाने वालों औरदारोगा-सिपाहियों सेनहीं डरने वाला वह,छैल चिकनिया बाबुओं केझांसे में नहीं आनेवालानहीं है डिगने वाला वह,चटूटान...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[03 May 2010 04:06 AM]



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