रूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर कहां है
चित्रांकन : राजेशारूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर कहां हैगले लगाया तुमने ही तो, मेरे जलन भरे सीने कोतेरे ही तो होंठ हैं प्यासे, मेरे सारे गम पीने कोदर्द भरी धड़कने मैं जी लूं, मुझमें इतना जोर कहां है।रूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर...
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Rajey Sha
कविता Kavita
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[03 May 2010 03:17 AM]



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