एक मौत, कई मौतें !!!!
किसी की मौत, किसी की जिन्दगी,किसी के गम किसी के आंसू,कहीं भावों का भवंर तो कहीं जीवन का सफ़र.सब से इतरमीडिया के लिए एक खबर.अनुपमा की मौत या ह्त्या मीडिया ने देखा अपना बाजार....लगी छलांग....बनना था समाज का ठेकेदार.....उठा लिया बीड़ा.......उस बाप...
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रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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[03 May 2010 02:57 AM]



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