'मिलन '

रात, मिलने का वादा कर जाने लगी,पंखुरी, फूल बन के  मुस्कुराने लगी, उजाले लिए गुलाबी, धरे पाँव सुबह ने, बूँदें ओस की, फिर झिलमिलाने लगी,पत्तों की छन्नी से, रौशनी जो गुज़री है,घास के फर्श पे, तस्वीरें सी संवरी हैं,दूर, चोटी से बर्फ, पिघली है सालों... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma
views
17
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
5
[02 May 2010 23:11 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix