'मिलन '
रात, मिलने का वादा कर जाने लगी,पंखुरी, फूल बन के मुस्कुराने लगी, उजाले लिए गुलाबी, धरे पाँव सुबह ने, बूँदें ओस की, फिर झिलमिलाने लगी,पत्तों की छन्नी से, रौशनी जो गुज़री है,घास के फर्श पे, तस्वीरें सी संवरी हैं,दूर, चोटी से बर्फ, पिघली है सालों...
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Yogesh Sharma
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[02 May 2010 23:11 PM]



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