एक नाज़ुक एहसास !
-उमेश पाठकदोस्तों ! काफी समय के बाद किसी से मिलना तो सबको अच्छा लगता है लेकिन कोई ऐसा जिससे ,आप जेहनी तौर पर जुड़े हों और वर्षों से उसका कुछ पता न हो....एक दिन अचानक ...फोन की घंटी......और फिर मिल-बैठ कर माजी (अतीत ) को कुरेदना /महसूस करना ........एक अजीब...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[02 May 2010 22:23 PM]



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