ये कैसी तकदीर लिखी तुमने-गज़ल
ये कैसी तकदीर लिखी तुमनेपावों में जंजीर लिखी तुमनेसांसे दी ,धड़कन भी दी लेकिनक्या जीने की तदबीर लिखी तुमने ढूंढ़ रहा है बेचारा रांझाइस बार नहीं हीर लिखी तुमनेनन्हे-मुन्नो की तख्ती पर क्योंबात गुरू-गम्भीर लिखी तुमनेफ़ूलो की महफ़िल में क्यों यारब...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[02 May 2010 21:54 PM]



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