उपन्यास 'बूढ़ी डायरी'' :सृजन-कथन
Shareचिर सम्मोहिनी छवि: नर्मदानर्मदा के प्रवाह का ग्राम्य अरण्य प्रेम सदा-सदा ही विश्रुत रहा है। लेकिन मैं तो नर्मदा से पहले-पहल अपने छोटे से नगर होशंगाबाद में ही मिला था। बचपन की न जाने कितनी स्मृतियां हैं और स्मृतियों का कोष आज भी कुछ न कुछ...
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माणिक
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[30 Apr 2010 11:46 AM]



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