थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान
मन कर रहा है आग लगा दूं सारी दुनिया को...जहाँ मैं इतनी मजबूर हूँ की जब चाहूँ तुमसे मिल नहीं सकती बात नहीं कर सकती पर इसमें दुनिया का क्या कसूर है? कसूर है तो सिर्फ तुम्हारा है या मेरा. . मेरा क्यूंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम्हारा क्यूंकि तुमने...
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Surbhi
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[02 May 2010 14:45 PM]



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