आतंक को पहचानो
मैंने देखा हैआतंकियों को हुआ हूँ गद्दारों से रू-ब-रू.मैंने थाली में छेद करने वाले देखे हैं देखी हैं हरकतें देश-विरोधी.मैंने देखे हैं देश के शहीदों के प्रति घृणित भाव. मैंने उन सरकारी दामादों को देखा है जिनकी आवभगत हर इलेक्शन में होती है जो ज़हर उगलते हैं,...
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PRATUL
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[02 May 2010 13:13 PM]



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