एक शेर शायद कुछ लोगों को अकल दे दे... आमीन !!!
मेंहदी हसन की गई एक बड़ी प्रसिद्द ग़ज़ल"अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्यालों में मिलें,जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले।"का एक शेर...=====================================तू खुदा है न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा, दोनों इंसान हैं तो क्यूँ इतने हिज़ाबों में...
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डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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[02 May 2010 11:00 AM]



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