व्यंग्य-संतई का संभावनापूर्ण रास्ता

व्यंग्यलोक //व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//     इन दिनों झूर के संत बनने का मन कर रहा है। क्या मजे है संतों के! बड़े-बड़े वातानुकूलित आश्रम, बड़ी-बड़ी लक्झरी गाड़ियाँ, धन-दौलत, सुख-समृद्धि, आनंद-मंगल सभी कुछ! सबसे बड़ी बात दर्जनों भक्तिनों का प्रेम-भक्तिभाव,... [पूरी पोस्ट]
writer प्रमोद ताम्बट
views
34
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
4
[02 May 2010 08:33 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix