भुल चुक माफ़... बस ऐसे ही लिख दिया.. क्या लिखूं?
लिखने का मन कर रहा था, कुछ सूझ ही नहीं रहा था... बहुत कोशिश की, कोशिश करते करते चिढ़ सी होने लगी... तो बस ऐसे ही कुछ अपनी सोच को ही लिख डाला की क्या लिखूं... तो बस कुछ ऐसे ही है, माफ़ करियेगा..कुछ कुछ सोचता हूँ,फिर कलम उठाता हूँ,औरफिर कुछ फाड़ता...
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हिमांशु पन्त
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[02 May 2010 08:05 AM]



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