भुल चुक माफ़... बस ऐसे ही... क्या लिखूं?

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की लिखने का मन कर रहा था, कुछ सूझ ही नहीं रहा था... बहुत कोशिश की, कोशिश करते करते चिढ़ सी होने लगी... तो बस ऐसे ही कुछ अपनी सोच को ही लिख डाला की क्या लिखूं...  तो बस कुछ ऐसे ही है, माफ़ करियेगा..कुछ कुछ सोचता हूँ,फिर कलम उठाता हूँ,औरफिर कुछ फाड़ता... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[02 May 2010 08:02 AM]

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