डा. एम.एस. परिहार के दो समसामयिक गीत
एक और संग्रामआजादी है अभी अधूरीपाये न जनता रोटी पूरी।तंत्र लोक से दूर हुआ हैअवमूल्यन भरपूर हुआ है।।आज देश टुकड़ो में बंटता जीना हुआ हराम।अभी देश को लड़ना होगा एक और संग्राम।।सपनों की लाशें आवाराबेबस का है नहीं गुजारा।माली ने गुलशन मसला हैगांधी का भारत...
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Dr M.S. Parihar
kavita
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[02 May 2010 07:41 AM]



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