जीने से पहले मरना
आज जीवन जीने वाला,कितनी बार मरता है,हर पल जीने से पहले, वह कई मर्तबा मरता हैमरने की सोचना आज नियति है, जीना बस एक झूठा सपना है,हर सपना रात के अँधेरे में,एक नयी उम्मीद जगाता है,सुबह सपना भी टूट जाता है,टूटना सपने की नियति है, ठीक उसी तरह जैसे, जीने के बीच...
[पूरी पोस्ट]
चन्दन कुमार
साहित्य
11
0
0
0
8
[02 May 2010 07:32 AM]



Shuffle








