सुकून के सुर...येसुदास

चौराहा हज़ारों मील लंबे रास्ते, गांव, गलियारे, नुक्कड़, चौराहे, अलग-अलग लहजा, तरह-तरह की ज़ुबान...यही तो है अपना हिंदुस्तान...विविधता से भरपूर देश, यहां के लोग अलग, उनके संस्कार अलहदा, लेकिन कहीं का भी, किसी इलाक़े का बाशिंदा क्यों ना हो...जब वो चैन चाहता है,... [पूरी पोस्ट]
writer चण्डीदत्त शुक्ल

शख्सियत

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[02 May 2010 07:42 AM]

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