सपने के पीछे ज़िद..
शीर्षक हमारा सपना था, हम यानि ओम, आशीष और मैं. ओम तब ओम पथिक हुआ करते थे, आशीष तब कुमार आशीष होते थे और मैं खुद क्षितिज विवेक हुआ करता था. ये सपना मध्यप्रदेश के रीवा में तब के हम बच्चों की आँखों में अंखुआया था.रीवा जो तब कस्बानुमा शहर था और शायद अब भी,...
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विवेक श्री
याद किया दिल ने..
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[01 May 2010 15:05 PM]



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