शोषण और प्रतिस्पर्द्धा का विलोप

महामानव प्रत्येक व्यक्ति प्राकृत रूप में भी अपनी आवश्यकता से बहुत अधिक उत्पादित करने की क्षमता रखता है  सभ्यता और वैज्ञानिक विकास कार्यों ने इस उत्पादन क्षमता को और भी अधिक संवर्धित किया है. इसलिए मानब जाति सही दिशा में चलने पर कभी अभावग्रस्त नहीं हो सकती.... [पूरी पोस्ट]
writer देवसूफी राम कु० बंसल

प्रतिस्पर्द्धा

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[26 Mar 2010 02:20 AM]

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