उदासी का राज.....
उदास मन,उदास मेरा, दिन और रात है। वजह नजर आती नही, ये कैसी बात है। या रब खफा है तू ,या खुद से खफा हूँ मै, समझ नही आता मिली, कैसी, सौगात हैं। पूछूँ किसे जाकर बताएगा यहाँ अब कौन, हर दिल का लगे ऐसा ही, मुझको हाल है। मन की आँख जैसे, मुझे दुनिया दिखे वैसे,...
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परमजीत सिँह बाली
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[01 May 2010 21:00 PM]



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