एक ग़ज़ल : रकीबों से क्या आप ....

हँसते रहो हँसाते रहो एक ग़ज़ल : रक़ीबों से क्या...... रक़ीबों से क्या आप फ़रमा रहे हैं ! हमें देख कर और घबरा रहे हैं इलाही! मेरे यह अदा कौन सी है ! कि छुपते हुए भी नज़र आ रहे हैं उन्हें आईना क्या ज़रा सा दिखाया वो पत्थर उठाए इधर आ रहे हैं सुनाया जो उनको ग़मों का फ़साना वह झुझँला रहे... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[02 May 2010 02:18 AM]

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