ओ माँ क्या तुम झूंठ बोलती थी
ओ माँ क्या तुम झूंठ बोलती थी तुमने कहा था दुनिया बड़ी प्यारी है कहा था यहाँ खिली प्रेम की क्यारी है पर मुझे तो हर बात दिखती न्यारी है हर और फैली नफरत और गद्दारी है ओ माँ क्या तुम झूठ बोलती थी तुमने कहा था प्रेम की नदी...
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Amit Sharma
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[02 May 2010 02:14 AM]



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