प्रचारतंत्र की जय [आज के नेता का स्वगत कथन]
मुझमें ना है कोई योग्यता फिर भी मैं हीरो हूँ.ना ही मुझमें रंग-रूप का कोई आकर्षण है.प्रबुद्ध जनों को शीघ्र प्रभावित कर लूँ — असंभव है.जिज्ञासु बालक की जिज्ञासा को शमन करन का मुझपर नहीं मंत्र-वंत्र है ना ही कुछ अध्ययन है.मैं केवल छपता रहता हूँ...
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PRATUL
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[02 May 2010 01:32 AM]



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