'वो कुम्हार'
झुकी कमर लिए, गर्दन टेढ़ी किये,दिखी एक काया, कांपते हाथों से,जिसे, मिटटी को,प्यालों का आकार देते पाया, गौर से देखने पर, मैंने, जब उन प्यालों को, थोड़ा टेढ़ा पाया, तो ख़ुद को रोक ना पाया, ठिठोली से पूछ बैठा, "बाबा, इतनी उम्र हो गयी, अब तक यह काम न...
[पूरी पोस्ट]
Yogesh Sharma
15
3
0
3
3
[02 May 2010 00:57 AM]



Shuffle








