एक सडी हुयी पोस्ट…
हवा मे एक खामोशी है और मन मे एक कोलाहल… सुबह के ९ बज रहे हैं और सारे रूममेट अभी सो रहे हैं… आज न जाने कैसे सुबह ५ बजे ही मेरी आँख खुल गयी है और लग रहा है कि सुबह कुछ जल्दी हो गयी है… सोचा था घर की थोड़ी सफ़ाई करूँगा… कपडे भी भिगोने थे… खैर… सवेरे सवेरे ही...
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Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)
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[02 May 2010 00:17 AM]



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