इति और उदय..
इति और उदय... वह फिर वहीं बैठी थी... उसी पार्क की उसी बेंच पे। उसका हाथ उदय के हाथ में था। होंठ कभी तन जाते, तो कभी ढ़ीले पड़ जाते। आँखों के निचले हिस्से में पानी भर आया था। बाक़ी आँखें सूखी पड़ीं थीं। इस अजीब स्थिति के कारण उसका बार-बार पलक झपकने का मन...
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मानव
कहानी....
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[02 May 2010 00:07 AM]



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