प्यार लगता उधार

मनोरमा कैसे कहते कि मुझको जमाने से प्यार।भाव दिखते नहीं प्यार लगता उधार।।प्रेम सचमुच जगत में बहुत अनमोल।जिसमें दुनियाँ समायी है आँखें तो खोल।फिर भी दिखता हो नफरत तो जीना बेकार।कैसे कहते कि मुझको जमाने से प्यार।भाव दिखते नहीं प्यार लगता उधार।।जिन्दगी जंग ऐसा कि... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[01 May 2010 22:23 PM]

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