मेरे पाँवों पर उगी है दूब
तुम दूर से मुझे देखोतो दिखता हूँ पत्थर का बुतनजदीक आ कर देखोतो दिखता हूँ कंकड़ों का समझौता,मेरे पाँवों पर उगी है दूबताजी बस अभी ही उगी.हवा सीटियाँ बजातीचुभोती है अपने नाखून मेरी देह मेंऔर खुरचती है बारिश मेरी त्वचा,मेरी नग्नता के भीतर से गुजरते हैंकई...
[पूरी पोस्ट]
मोहन राणा - Mohan Rana
11
2
0
2
0
[01 May 2010 19:09 PM]



Shuffle








