संभव नहीं

दर्शन-प्राशन घन मेघ हों गर्जन न हो संभव नहीं. सौंदर्य हो यौवन न हो संभव नहीं. हृत पुष्प हो नवयौवना का जब खिलाअलि नाद हो मर्दन न हो संभव नहीं.चिर प्रेम हो प्रियतम न हो संभव नहीं.सुर ताल हो सरगम न हो संभव नहीं. जब हों बंधे नृत्यांगना पद में नूपुर संगीत हो नर्तन न हो... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[27 Jan 2010 00:38 AM]

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