3.33"

दर्शन-प्राशन तीन दशमलव तीन-तीनइंचों की है मुस्कान छली.छले गए चख दोनों मेरे विनय-कथन हो गया बली.बली हो गए शब्द सभीअवरुद्ध हो गयी वाक् गली.जिव्हा पर जल रहीं चिताएं शब्दों की, अब ख़ाक भली.उर तक जाती अनल चिता की स्मृतियों की जब पवन चली.तीन तीन तैंतीस संचारी भावों में... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[08 Feb 2010 21:27 PM]

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