कहो कुछ बेशक आप नहीं
कहो कुछ बेशक आप नहीं इस जीवन की यही विषमता साफ़ कहो तो मिले विफलता हम तुमसे कुछ कहें —फेरते मुख को आप कहींकहो कुछ बेशक आप नहीं .छूट गया मिलना-जुलना सब पुनः मिलेंगे शायद न अबजितना तुमसे दूर चलूँ आ जाता लौट वहीँ कहो कुछ बेशक आप नहीं .धुरी आप मेरे चिंतन की...
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Pratul
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[08 Feb 2010 21:42 PM]



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