ज्ञानोपनयन-१

दर्शन-प्राशन आर-पार दिखने वाले पर्दों को मुझसे हटा अरी.नयन-दीप जलते हैं पीछे जल जावेंगे करो घरी.मुझ नयनों के लिए एक ज्ञानोपनयन* ला करके दो.जिसे पहन हर वास्तु पुरातन नूतन-सी दिखती बस हो.(*ज्ञानोपनयन — चश्मा - ज्ञान का)प्रेरणा — ऋतुराज परी... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[14 Feb 2010 22:25 PM]

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