ज्ञानोपनयन-2

दर्शन-प्राशन "ज्ञानोपनयन देना मुझको "बोली – क्यों-क्यों-क्यों-क्यों-क्यों-क्यों."कुछ वस्तु  पुरातन देखन को "बोला मैंने उससे जब यों.वो मंद-मंद मुस्का बोली –"मैं समझ गयी तेरी बोली तुम गोल-मोल बातें करकेसूरत दिखलाते हो भोली"."तुम नहीं समझ पाए मुझको क्यों मांग रहा... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[15 Feb 2010 22:30 PM]

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