खोखली धारणा

दर्शन-प्राशन जिसके अर्चन में दिवस रात रहती थीं निज आँखें सनाथ.जिसके आँचल में बैठ मुझे मिलता था ईहित प्यार-मात.जिसके दर्शन से नयन धन्य समझा करता खोले कपाट.जिसके चलने पर ऊंच-नीच पथ को करता था मैं सपाट.जिसके नर्तन पर कभी-कभी कवि उर में आ जाता भूचाल.कविता बेचारी इधर-उधर... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 22:41 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix