आगमन
संयम की प्रतिमा बन जाओ जितनी चाहे जड़ता खाओ आगमन हुवेगा जब उसका भूलोगे अ. आ. इ. ई. ओ. दृग फेर चाहे मुख पलटाओया निर्लज हो सम्मुख आओपहचान हुवेगी जब उसकीसूझेगा केवल वो ही वो.मन की बातें न झलकाओपीड़ा को मन में ही गाओ उदघाटित हो जाएगा जबहंसेगे सब हा. हा. हो....
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Pratul
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[13 Mar 2010 08:01 AM]



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