सौंदर्य उपासना

दर्शन-प्राशन उठ गयी आज जल्दी सजनी सब केश खुले से खुले बिखरे सो रही उसी पर थी रजनी.कर ग्रंथि केश मुख धोन चलीमद नयन भरे से भरे दिखतेधो रही शीत चख कुंद कली.(जब मैंने प्रातः उठने पर सौंदर्य को मुख धोते देखा)... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[13 Mar 2010 23:25 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix