सौंदर्य उपासना
उठ गयी आज जल्दी सजनी सब केश खुले से खुले बिखरे सो रही उसी पर थी रजनी.कर ग्रंथि केश मुख धोन चलीमद नयन भरे से भरे दिखतेधो रही शीत चख कुंद कली.(जब मैंने प्रातः उठने पर सौंदर्य को मुख धोते देखा)...
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Pratul
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[13 Mar 2010 23:25 PM]



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