मान्यताओं को बदलने का साहस मुझमें नहीं!

दर्शन-प्राशन निद्रा — मेरा असमय आना द्वारपाल के लिए बुरा है. मेरा अधिक आना विद्यार्थी के लिए दोष है, ब्रह्मचर्य का नाशक है. मेरा कम आना रोगी के लिए दुःखदायक है. किन्तु, मेरा शैशव के प्रति स्नेह सभी को भाता है. क्यों? क्या मैं मात्र शिशुओं के प्रेम की अधिकारिणी हूँ?... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[06 Apr 2010 00:25 AM]

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