कुम्भ का मेला

दर्शन-प्राशन सभी स्वच्छ पथ उर के मेरे अब चलो आप निर्भय होकरसब तरफ आज घेरेंगी, पिय कष्टों की टोली 'हो'...'हो' कर.छिप गयीं आप क्यूँ घबराकर मेला है ये तो कुम्भ, मकर राशि में मिलने अब गुरु से आना चाहे है बस दिनकर.चख-बाण छोड़ दो तुम धनु से मन के तापों का हरण करोसब कष्ट... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[15 Apr 2010 15:15 PM]

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