विषैला आलिंगन
श्वासों का हो गया समन्वय ह्रदय अनल के घेरे में हो ढूँढ रहा था शीतलता-आलंबन.अनिल दौड़ता होकर निर्भय गरम-गरम श्वासों का चलना जला रहा था ह्रदय का नंदन-वन.शीत्कार की ध्वनि, संकुचित भविष्य द्वार, होता पर-शोषित कसी जा रही थी बाँहों की जकड़न.संयम था...
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Pratul
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[21 Apr 2010 14:18 PM]



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