परिवर्तन है या पतन-परा?

दर्शन-प्राशन मैं हूँ अपराधी बहुत बड़ामैं हूँ अपराधी बहुत बड़ा.निर्लज लज्जा लुटने को थी मैं देख रहा था खड़ा-खड़ा.आँखों में आँसू नहीं कहीं था उनमें इक आश्चर्य भरा.आ रही स्वयं लज्जा लुटने परिवर्तन है या पतन-परा?आँखें मरने को हैं तत्पर इक शील-भंग की घटना पर.जो रहीं अभी तक... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[26 Apr 2010 15:12 PM]

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