विपरीत से तुम सीध में आओ
विपरीत से तुम सीध में आओ.अरी! पीठ न तुम मुझको दिखाओ.मैं तुम्हें बिन देखकर पहचान लेता हूँ.कल्पना से मैं नयन का काम लेता हूँ.एक बार फिर कवि से आँख मिलाओ. अयि! मुझे तुम नेह का फिर गीत सुनाओ.कल्पना-विमान फिर से भेज देता हूँ."कंठ में आना" — तुम्हें सन्देश...
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Pratul
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[27 Apr 2010 15:04 PM]



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