साथ चलें

HPSHARMA बंद करो तकरार मुझे तुम माफ़ करोजीत गए अब तो अश्को को साफ करो.तुम से होकर दूर मुझे हिचकी सी आतीदिल की धड़कन अक्सर थम थम जाती.निकल गए सब कांटे लेकिन घाव हराआशंकाओ से मेरा मन रहता डरा-डरा.किन्तु मन मे फिर भी जीवित आशा हैशायद यही प्रीत की चिर परिभाषा है.जव... [पूरी पोस्ट]
writer हरि शर्मा
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[01 May 2010 15:49 PM]

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