A poetess blog
अश्कों से धुले लम्हों को पोंछती रहती हूँकैसे जियूं ये रिश्ते बस सोचती रहती हूँफुरसत में कही कोई गम याद न आ जाये मसरूफियत में खुशियों को खोजती रहती हूँ...
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ranjana
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[01 May 2010 14:50 PM]



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