बढ़िया बहुत पसीना : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

नन्हा मन बढ़िया बहुत पसीना गरमी के मौसम में लगता, बढ़िया बहुत पसीना! जब शरीर का ताप बढ़े यह, निकल-निकलकर आए! धीरे-धीरे भाप बने, फिर शीतलता पहुँचाए! यह ना आए, तो हो जाए मुश्किल सबका जीना! गरमी के ... ... . रोमछिद्र... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

रावेंद्रकुमार रवि

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[01 May 2010 14:31 PM]

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