हल्का नहीं हुआ है गुलमुहर का लाल परचम

कर्मनाशा तुम्हारा नाम( दो कवितायें )०१-किसी फूल का नाम लिया और भीतर तक भर गई सुवासकिसी जगह का नाम लियाऔर आ गई घर की यादचुपके से तुम्हारा नाम लियाऔर भूल गया अपना नाम।०२-असमर्थ - अवश हो चले हैं शब्दकोशशिथिल हो गया है व्याकरणसहमे - सहमे हैं स्वर और व्यंजनबार - बार... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

कविता

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[01 May 2010 09:52 AM]

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