सब मुझको समझायेंगे
सब मुझको समझायेंगे फिर तुमको बहलाएँगे उलझी खूब पहेली है कौन इसे सुलझाएंगे होली पर भी कुछ पागल दीवाली के गायेंगे समझेगा भी कौन यहाँ किस किस को समझायेंगे जीती बाज़ी हारेंगे अहम् जहां टकरायेंगे पढ़े नहीं...
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jogeshwar garg
ghazal
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[01 May 2010 09:32 AM]



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