मिलन के क्षण!

क्वचिदन्यतोअपि..........! मिलन- विछोह ,पीड़ा  -आनंद ,निकटता  और दूरी की पारस्परिक विपरीत अनुभूतियाँ तो आनी जानी रहती हैं इस फानी जीवन में ..एक कब गयी और दूसरी कब आई इसका भी क्या लेखाजोखा रखा जाय ..बस यही समझ लीजिये कि अगर इन जोड़ों में से कोई एक साथ है तो दूसरा भी ताक... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[01 May 2010 08:44 AM]

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