बंधुआ मजदूरी नए ज़माने की [मज़दूर दिवस पर विशेष]
आज काप्रत्येक व्यक्तिहो चुका है जागरूकशिक्षा ने उसमें चेतना घुसाई है.प्रशासन भी दे रहा है भरपूर सहयोग शिक्षा को.— आँखें खोलने के लिए अंधी रूढ़ियों की —कर रहा है स्थापित विश्वविद्यालय.व्यक्ति पा सके रोजगार ऐसे-ऐसे पाठ्यक्रमों को चलाता है जनता के...
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PRATUL
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[01 May 2010 08:34 AM]



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