फिर से सोचिये।
देश, धर्म, लोक-परलोक कुछ नहीं बस सोच है,इन सोचों में बंटा-बंटा क्या है? फिर से सोचिये।दुख आयेगा, डर लायेगा, दर्द के बादल छायेंगेहर सुख के बाद घटा क्या है? फिर से सोचिये।दुश्मन रोज मिला करता है, रखता खोज-खबर अपनी,दोस्त के दिल में घटा क्या है? फिर से...
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Rajey Sha
दृष्टिकोण
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[01 May 2010 08:02 AM]



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