कश्मीर: पत्थर युग मे लौटने की कबायद तेज

hamargam घर से ऑफिस निकले शफीक अहमद शेख को नहीं पता था कि अगले चौक पर कुछ पत्थर वाले उनका इंतजार कर रहे है .जैसे ही उनकी मिनी बस मगरमाल बाग पहुची एक पत्थर सीधे बस की ओर उछाला गया .ओर सीधे चोट शेख के सर पर लगी .कुछ ही पल में शेख सदा सदा के लिए खामोश हो गए... [पूरी पोस्ट]
writer vinod kumar mishra
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[01 May 2010 06:55 AM]

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