घर : दो

कस्बे का कवि... अपने घर सेमीलों दूरइस अजनबी शहर मेंदस बाई बारह कायह कमराकभी-कभीरेल के डिब्बे मेंतब्दील हो जाता हैआधी रात के बादऔर भागने लगता हैघर की तरफ़.... [पूरी पोस्ट]
writer मणिमोहन
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[01 May 2010 05:17 AM]

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